कफ सिरप का काला कारोबार! क्या पूर्वांचल में किसी बड़े ‘हाथ’ का है संरक्षण? सच या सिर्फ साज़िश?
ब्लैक मार्केट में नशा और करोड़ों का खेल—कफ सिरप कांड का सबसे बड़ा राज़ क्या?

क्या जौनपुर के बाहुबली धनंजय सिंह के इलाके से जुड़ा है कफ सिरप का काला कनेक्शन? या फिर यह सिर्फ चर्चाओं का ज़हर है?
बेबाक मंच | विशेष रिपोर्ट
पूर्वांचल में इन दिनों खांसी से ज़्यादा चर्चा कफ सिरप की है—क्योंकि यह वही दवा है जो राहत देने के बजाय अब राहत के नाम पर नशे और अवैध मुनाफे का ज़रिया बनती जा रही है। जौनपुर, गाजीपुर, मऊ, आज़मगढ़, गोरखपुर से लेकर नेपाल बॉर्डर तक लगातार कफ सिरप की अवैध सप्लाई की खबरें उठ रही हैं।
और इसी काले कारोबार के बीच एक सवाल अब ज़ोर पकड़ रहा है- क्या इस नेटवर्क का कोई “बड़ा छुपा हाथ” है? और क्या इसलिए जौनपुर के बाहुबली नेता धनंजय सिंह का नाम चर्चा में आ रहा है?
यहां साफ कर देना ज़रूरी है-
◼️ किसी एजेंसी ने अब तक उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं दिया है।
◼️ इस रिपोर्ट के माध्यम से उन पर कोई आरोप नहीं लगाया जा रहा है।
◼️ न ही Bebak Manch यह दावा करता है कि उनका इससे कोई संबंध है।
मगर फिर भी… चर्चा क्यों?
कफ सिरप का काला खेल—फार्मा से फर्जी बिलिंग तक
सूत्रों के अनुसार अवैध नेटवर्क की प्रक्रिया कुछ यूँ है –
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हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और पश्चिमी यूपी के कुछ फार्मा यूनिट्स से सिरप कानूनी बिलिंग में भेजा जाता है।
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रास्ते में फर्जी बिल, GST हेराफेरी, और बेनामी लेन-देन के जरिए वही खेप असली रास्ते से हटाकर अवैध बाजार में पहुँचा दी जाती है।
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कुछ रुपये की कीमत वाला सिरप ब्लैक मार्केट में सैकड़ों रुपये में बेचा जाता है।
स्कूल–कॉलेजों के पास, ढाबों, सुनसान गलियों और छोटे मेडिकल स्टोर्स पर इसकी गुप्त बिक्री आम बात हो चुकी है।
सबसे बड़ा सवाल:
इतना बड़ा कारोबार बिना किसी बड़े संरक्षण के कैसे चल सकता है?
धनंजय सिंह का नाम चर्चाओं में क्यों?
जौनपुर और आसपास का क्षेत्र वर्षों से धनंजय सिंह के राजनीतिक–सामाजिक प्रभाव वाला इलाका माना जाता रहा है। इसी वजह से जब कफ सिरप का अवैध नेटवर्क सबसे तेज़ी से यही इलाकों में सक्रिय दिखाई देने लगा, तो कई स्थानीय लोग और विपक्षी खेमे ने उनके नाम का ज़िक्र करना शुरू कर दिया।
लेकिन- कोई FIR नहीं, कोई आधिकारिक जांच नहीं, कोई सीधा सबूत नहीं तो फिर सवाल- क्या यह सिर्फ राजनीतिक साजिश है? या किसी छुपे हुए “कनेक्शन” का संकेत? इसका उत्तर सिर्फ जांच ही दे सकती है।
सरकार को करोड़ों का नुकसान, युवाओं की ज़िंदगी दांव पर
इस पूरे काले खेल में-
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सरकार को करोड़ों का टैक्स और राजस्व नुकसान
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युवा पीढ़ी तेजी से नशे की गिरफ्त में
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सिस्टम का चौंकाने वाला मौन
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और तमाशा देखती एजेंसियां
इन सभी तत्वों ने कफ सिरप के गेरुए कारोबार को और भी रहस्यमय बना दिया है।
सबसे बड़ा प्रश्न—खांसी कौन रोकेगा?
कफ सिरप की इस कड़वी सच्चाई को लेकर अब पूर्वांचल में तीन संभावित जवाब तलाशे जा रहे हैं-
1. प्रशासन 2. नेता 3. जागरूक जनता
कौन सबसे पहले आगे आएगा, और कौन खामोशी में छिपे सच को उजागर करेगा—यह अभी सस्पेंस है।

