बलरामपुर | प्रधान पर हमला, युवती का अभद्र वीडियो और प्रशासनिक खामोशी ? क्या 29 नवंबर का जुटान बदलेगा समीकरण ?
प्रधान पर जानलेवा हमला और OBC समाज का अपमान करने वाली युवती व मुख्य आरोपी पर कार्रवाई अब तक नहीं! फ़रार आरोपी, चुप पुलिस- 29 नवंबर को .. .?
बलरामपुर में जमीन विवाद से जातीय तनाव भड़का: प्रधान पर जानलेवा हमला, अपमानजनक वीडियो से बढ़ा बवाल—मुख्य आरोपी फ़रार, पुलिस की भूमिका पर सवाल तेज
बलरामपुर/सेखुईया। सेखुईया गांव में जमीन को लेकर शुरू हुआ पुराना विवाद अब प्रदेश भर में जातीय तनाव और प्रशासनिक कार्रवाई पर बड़े सवालों के रूप में उभर आया है। 24 अक्टूबर को हुए विवाद के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों को कोर्ट के फैसले तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था, लेकिन इसके अगले ही दिन 25 अक्टूबर को हालात अचानक बेकाबू हो गए। आरोप है कि ठाकुर समाज के कुछ लोगों ने कुर्मी समाज से आने वाले ग्राम प्रधान और उनके परिवार पर जातिसूचक टिप्पणियां कीं और उसी दौरान उन पर सुनियोजित तरीके से जानलेवा हमला कर दिया। हमले में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए और उन्हें बहराइच जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पीड़ित पक्ष ने 16 नामजद और 50 अज्ञात लोगों पर FIR दर्ज कराई है। परिवार का आरोप है कि इस पूरे मामलों का मुख्य साज़िशकर्ता राहुल सिंह, जो स्थानीय SDM का स्टेनो बताया जा रहा है, अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर है, उसी परिवार की एक युवती का कुर्मी समाज के साथ साथ पूरे OBC को अपमानित करता वीडियो वायरल होने से प्रदेशभर में नाराज़गी और बढ़ गई है।
29 अक्टूबर को प्रदेश के कई जिलों से सामाजिक कार्यकर्ता बलरामपुर पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोककर कप्तान कार्यालय बुलाया। वहाँ प्रशासन ने तीन दिन के भीतर मुख्य आरोपी और अपमानजनक टिप्पणी करने वाली युवती की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया। समाज ने पुलिस को दस दिन का समय दिया, लेकिन समय सीमा खत्म होने के बावजूद प्रमुख आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई। 27 नवंबर को दो लोगों की गिरफ्तारी ज़रूर हुई, लेकिन मुख्य आरोपी और वायरल वीडियो में दिख रही युवती अब भी आज़ाद घूम रही हैं, जिससे पुलिस की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
29 नवंबर को बड़े जुटान की घोषणा के बीच 28 नवंबर को प्रदेश के कई जिलों में सामाजिक कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा हाउस अरेस्ट किए जाने की खबरें सामने आ रहीं है । सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी स्वीकार करते दिखते हैं कि उन्हें “ऊपर से निर्देश” मिला है कि 24 घंटे तक कार्यकर्ताओं को घरों में ही रोका जाए। सवाल यह है कि शांतिपूर्वक जुट रहे लोगों को रोकने में सक्रिय दिखने वाली पुलिस नामजद आरोपियों को पकड़ने में इतनी सुस्त क्यों है?
समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधियों का कहना है कि 29 नवंबर को बड़ी संख्या में लोग बलरामपुर पहुँचेंगे और जब तक मुख्य आरोपी और अभद्र टिप्पणी करने वाली युवती की गिरफ्तारी नहीं होती, धरना जारी रहेगा। उनका कहना है कि यह मामला अब सिर्फ एक परिवार का नहीं बल्कि पूरे समाज के सम्मान और कानून-व्यवस्था पर भरोसे का प्रश्न बन चुका है।
योगी सरकार के “जीरो टॉलरेंस” दावे के बीच पुलिस की ढुलमुल कार्रवाई ने शासन की छवि पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब 29 नवंबर के विशाल जुटान पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि यह मामला सिर्फ एक विवाद नहीं बल्कि प्रशासनिक निष्पक्षता और कानून के राज की गंभीर परीक्षा बन गया है।

